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जीण माता मंदिर और काजल शिखर

सालासर धाम और खाटू श्याम जी धाम की यात्रा भाग 7

जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir से पहले एक छोटा-सा बाज़ार है। एक व्यक्ति इशारों से हमें कार पार्किंग में मदद करता है। वह अपनी दुकान के सामने हमारी कार पार्क करवा देता है। जब उतरकर हम उसका धन्यवाद करते हैं, तो वह अपनी मार्केटिंग स्ट्रैटेजी हमारे सामने रख देता है।

“प्रसाद ले लीजिए जी, हमारी दुकान से। इसे ही पार्किंग फीस समझ लीजिए,” उसने कहा।
व्यापार तो व्यापार है। अपनी दुकान की बिक्री बढ़ाने का उनका यह तरीका भी ठीक ही था।

आगे एक नाका लगा है, जिसका उद्देश्य वाहनों को आगे जाने से रोकना ही था। इसके आगे एक बहुत चौड़ी गली है, जो मंदिर के मुख्य द्वार तक जाती है। यह गली ऊँची शेडनुमा छत से ढकी हुई है और इसके दोनों ओर प्रसाद की दुकानें हैं। दुकानों के पीछे प्राचीन इमारतें हैं, जो शायद धर्मशालाएँ रही होंगी, लेकिन अब उनकी हालत ठीक नहीं लगती। थोड़ा आगे बढ़कर हम जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir के मुख्य द्वार से मंदिर में प्रवेश करते हैं।

सीढ़ियाँ चढ़कर हम Jeem Mata Mandir मंदिर के गर्भगृह वाले हिस्से में पहुँचते हैं। संगमरमर के बड़े-बड़े स्तंभों वाले इस Jeem Mata Mandir मंदिर की छत बहुत ऊँची नहीं है। अंदर बहुत ही सुंदर ढंग से जीण माता की मूर्ति सजी हुई है। अंदर का पूरा भाग संगमरमर का है। मंदिर के ऊपर लंबाई में एक गुंबद है, जो यहाँ से दिखाई नहीं देता, लेकिन काजल शिखर की ओर रोपवे से जाते समय यह नज़र आता है।

रेवास झील Rewas Lake के पास रावता गाँव में स्थित यह ऐतिहासिक और प्राचीन जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir है। इसकी दूरी सीकर Sikar और खाटू श्याम Khatu Shyam ji—दोनों से लगभग 25-25 किलोमीटर है। इसी स्थान से अरावली Aravalli Hills पर्वतमाला की शुरुआत हो जाती है। जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir ज़मीन के स्तर से लगभग 20-25 फीट की ऊँचाई पर ही है, लेकिन इसके साथ ही काजल शिखर स्थल Kajal Shikhar Mandir का मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है। वहाँ पैदल भी जाया जा सकता है और जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir से रोपवे के माध्यम से भी पहुँचा जा सकता है।

हम रोपवे से जाते हैं। रोपवे से जीण माता मंदिर Jeem Mata Mandir का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है और पूरा इलाका आध्यात्मिकता से भरा हुआ महसूस होता है। काजल शिखर Kajal Shikhar, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह जीण माता और उनके भाई हर्ष का मिलन स्थल है, वहाँ भी एक मंदिर बना हुआ है। यहाँ से आसपास के पूरे क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखना आनंददायक होता है। इलाके में झाड़ीदार पेड़-पौधे बहुत दिखाई देते हैं और यहाँ से चारों ओर की हरियाली देखी जा सकती है। हालाँकि ये पेड़ छोटे पत्तों वाले हैं, जैसे कम वर्षा वाले जंगलों में होते हैं।

जीण माता की कथा सुनाते हुए विजय पाल जी बताते हैं कि जीण माता का गाँव यह नहीं था। उन्हें अपने भाई हर्ष से बहुत प्रेम था, लेकिन भाई के विवाह के बाद जब भाभी आईं, तो उन्होंने भाई-बहन के बीच दूरी पैदा कर दी। इसके बाद जीण माता इस मंदिर वाले स्थान पर आकर तपस्या करने लगीं और काजल शिखर वाले स्थान पर भाई-बहन का दोबारा मिलन हुआ।

काजल शिखर Kajal Shikhar से वापस आकर हम कचौरी खाने का निर्णय करते हैं, क्योंकि इसके बाद हमें हर्ष पर्वत जाना था और हमें बताया गया था कि वहाँ खाने-पीने की अच्छी व्यवस्था नहीं होगी।

अब हमारा अगला पड़ाव हर्ष पर्वत Harsh Parvat था, जहाँ हमें लगभग 1000 साल पुराने मंदिर के दर्शन करने थे।

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