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हर्ष पर्वत पर 1000 साल पुराना हर्षनाथ शिव मंदिर

“जब यह Harsh Nath Shiv Temple मंदिर यहाँ बनाया गया होगा तब न तो सड़क रही होगी और न ही आज जैसे संसाधन,” मेरा सवाल था।
विजय पाल कहने लगा, “हाँ, यह सचमुच कमाल है। पुराने समय में इस तरह की ऊँची जगहों पर इमारतें कैसे बनाई गईं और उनके लिए पत्थर पहाड़ी की चोटी तक कैसे पहुँचाए गए — यह उस समय के लोगों के हौसले और कौशल का प्रतीक है।”

हर्षनाथ शिव मंदिर Harsh Nath Shiv Temple हर्ष पर्वत की चोटी पर बना हुआ है। महामेरु शैली में निर्मित यह मंदिर सचमुच दर्शनीय है। यहाँ पहले कई मंदिर थे, पर कहा जाता है कि मुगल काल में औरंगजेब ने इन मंदिरों को तुड़वा दिया और अब यहाँ केवल एक मुख्य मंदिर शेष है। दो छोटे मंदिर टूटे हुए अवशेषों से पुनर्निर्मित किए गए हैं तथा एक भैरवनाथ का मंदिर Bhairav Nath Temple भी है।

मंदिर परिसर एक ऊँचे चबूतरे पर बना है और जो मुख्य मंदिर है, वह उससे भी ऊँचे चबूतरे पर स्थित है। मंदिर की बुर्जियों पर अनेक सुंदर मूर्तियाँ उकेरी गई हैं। कई मूर्तियों के हिस्से मंदिर परिसर के एक ओर रखे हुए हैं, पर उनकी उचित देखभाल का अभाव दिखाई देता है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग Archeological Survey of India द्वारा संरक्षित है, फिर भी यहाँ नियमित पूजा-अर्चना होती है। मंदिर के पास ही एक विशाल नंदी विराजमान है। भैरव मंदिर की दीवारों में भी मुख्य मंदिर से निकली मूर्तियाँ जड़ी हुई हैं।

कहा जाता है कि यह मंदिर 956 ईस्वी में चाहमान शासकों के शासनकाल में विग्रहराज के समय, शिव संत भावभक्त की प्रेरणा से बनवाया गया था। यहाँ पुरातत्व विभाग द्वारा लगाए गए शिलालेख के अनुसार मंदिर में गर्भगृह, अंतराल, रंग मंडप, अर्ध मंडप और नंदी मंडप निर्मित थे।

पहाड़ी की चोटी पर स्थित होने के कारण यहाँ से आसपास का दृश्य अत्यंत मनोहारी दिखाई देता है। यहाँ से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित सीकर शहर भी साफ दिखाई देता है। मंदिर में मत्था टेकने के बाद हमारी वापसी की यात्रा शुरू होती है। हम गाड़ी सीकर Sikar वाली सड़क पर डाल देते हैं। इस यात्रा-वृत्तांत की यहाँ समाप्ति होती, लेकिन रास्ते में एक और प्राचीन स्थल अचानक देखने को मिल गया, जिसके बारे में अगली कड़ी में बताएँगे और तब राजस्थान की इस यात्रा का समापन होगा। इसलिए अगली कड़ी तक जुड़े रहिए।

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